क्या बन्दर मनुष्यों के पूर्वज हैं ? Human ancestors - hindivigyan

क्या बन्दर मनुष्यों के पूर्वज हैं ? Were apes human ancestors ?

जन्म से लेकर आज तक हमें विज्ञान और विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों के माध्यम से और अन्य माध्यमों से यह बताया गया है की बन्दर या वानर हमारे पूर्वज हैं | और ऐसा इस लिए क्योंकि इतिहास में मानव सभ्यता के बारे में जो भी सबूत हमें मिलें हैं उस आधार से यह कहना गलत भी नहीं है क्योंकि इतिहास भी इसी के पक्ष में है | विज्ञान ने सदैव ही प्राप्त आंकड़ों के अनुसार एक सटीक पर काल्पनिक थ्योरी का निर्माण किया है और इस तरह हम ये कह सकते हैं की यह विज्ञान के इन सिद्धांतों यथार्थ की पुष्टि नहीं होती | परन्तु फिर भी हम इस सिद्धांत का विश्लेषण करते हैं | 

मानव इतिहास :

अंतरिक्ष और ब्रह्मांड के निर्माण से लेकर पृथ्वी और सौरमंडल के निर्माण तक की प्रक्रिया बहुत लम्बी थी |जीवाश्म के अनुसार मानव जाति की पृथ्वी में उत्पत्ति लगभग 6 करोड़ 60 लाख वर्ष पूर्व हुई थी | मानव जाति की सबसे पहली प्रजाति होमो एरेक्टास थी जो अफ्रीका महाद्वीप में पायी जाती थी | फिर यह जाति करीब 13 से 18 लाख वर्षों के बाद ये दुनिया के अन्य महाद्वीपों जैसे एशिया और यूरोप में फ़ैल गये |

1859 में चार्ल्स डार्विन ने एक पुस्तक को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जिसका नाम था 'प्रजातियों की उत्पत्ति' ( ओरिजिन ऑफ द स्पीशीज ), जिसके माध्यम से उन्होंने दुनिया को यह समझाने की कोशिश की कि किस तरह हर प्राणी एक क्रमिक विकास के चलते अपने से बेहतर रूप में आगे पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ता चला गया । चार्ल्स डार्विन के अनुसार आप अपने माता पिता की पूरी की पूरी नकल नहीं हैं । और आने वाले समय में ये जरूरी नहीं कि आपकी शारीरिक संरचना आपके पूर्वज से मिलती जुलती ही हो । यह संभव है कि इसका आपको थोड़ा बहुत लाभ मिले पर जलवायु परिवर्तन, वातावरण परिवर्तन और भोजन व्यवस्था ठीक वैसी ही मिले जिसके साथ आपने जन्म लिया है । ऐसी परिस्थिति में आपका शरीर आपके पूर्वजों से आकार में छोटा हो सकता है ताकि वह उस जलवायु और उतने कम खाने में जिंदा रह सके ।

विकास के रास्ते पर आगे गए ये प्राणी धीरे धीरे अपने शरीर की संरचना में इनके शरीर की संरचना बदल जाती है । चिम्पांजी और मनुष्य का जेनेटिक ढांचा 99% तक मेल खाता है । तो फिर ये क्यों न कहा जाए कि वानर ही हमारे पूर्वज थे पर प्रश्न उठता है कि फिर वे अभी भी अस्तित्व में क्यों है ? यह बात मानव क्रमिक विकास के नियम का खंडन करती है । पर अब प्रश्न यह उठता है कि मानव जीवन फिर आया कहाँ से ?

विज्ञान के अनुसार दुनिया में सबसे पहले मानव जाति का अवतरण अफ्रीका में हुआ था । अफ्रीका के जंगलों में रहने वाले हमारे पूर्वज पहले चौपाये थे फिर प्राकृतिक रूप से जलवायु परिवर्तन के कारण अफ्रीका का सवाना जंगल समाप्त होने लगा और फिर यह जमीन पर चलने पर मजबूर हो गए । शरीर का ढांचा जो कि चार पैरों से चलने वाला था ऐसे में उन वनमानुषों को चलने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता था जैसे कि मांसाहारी प्राणियों से अपनी जान बचाना, लंबी दूरी तक पैदल चलने पर शरीर से अधिक ऊर्जा की खपत होना आदि । ऐसे में उन प्राणियों ने दो पैरों पर चलना शुरू कर दिया । ताकि शरीर की ऊर्जा कम खर्च हो ।मानव जाति की नींव रही उस प्रजाति को ऑस्ट्रेलोपिथेकस कहा जाता है ।

ऑस्ट्रेलोपिथेकस मानव के आधुनिक युग के स्वरूप से मिलता जुलता तो था लेकिन मस्तिष्क का आकार आज के मनुष्य से बहुत छोटा होता था । मानव वैज्ञानिकों के अनुसार इनका अस्तित्व आज से करीब 40 लाख वर्ष पहले इस धरती पर हुआ करता था । होमो सेपियन्स से सबसे निकटतम मानव होने के बावजूद भी इनका मस्तिष्क आकार में बहुत छोटा हुआ करता था । ये मूलरूप से शाकाहारी थे और बोलने में असमर्थ होते थे ।

डार्विन के विकासवाद का प्रस्तुतिकरण :

मानव विकास के लिए प्रस्तुत की गई इस तस्वीर को समझने के लिए डार्विन ने जिस तकनीक का सहारा लिया है वह वास्तव में मानव विकास के विभिन्न रूपों को दर्शाती है परंतु उस तस्वीर को यह समझ लिया गया कि मनुष्य पहले बन्दर था । मनुष्य बन्दर नहीं बल्कि वानर की तरह दिखने वाला प्राणी था । वानर अर्थात वन+नर । पृथ्वी पर जीवोत्पत्ति की शुरुआत अमीबा नामक एक कोशिकीय प्राणी से हुई थी । विकास के चलते इससे बहुकोशिकीय प्राणियों की उत्पत्ति हुई । क्रमिक विकास का इनका वृक्ष बनता गया और आज वे प्राणी अपने विकसित स्वरूप में हैं । इस तरह हम ये कह सकते हैं कि मानव या यूं कहें कि हर प्राणी का पूर्वज अमीबा था । 

वानर से मनुष्य तक का विकास :

प्राथमिक स्तर पर मानव और बन्दर के पूर्वज लगभग एक प्रकार के दिखाई देते थे जिसे वानर कहा जाता था । और समय के अनुसार उनमें से कुछ प्राणी मानव रूप में विकसित हुए तो कुछ बन्दर के रूप में । इस तरह मानव और बन्दरों के पूर्वज एक ही थे लेकिन बन्दर मानव के पूर्वज नहीं थे । क्योंकि बन्दर का आज का भी अस्तित्व में होना इस बात पर प्रश्नचिन्ह लगाता है की क्या बन्दर मनुष्य के पूर्वज थे ? क्योंकि बन्दर आज के समय में भी वैसे ही क्यों हैं जैसे चिम्पांजी, ओरांगुटान गिब्बन आदि । क्योंकि इतने समय के बाद मनुष्य तो बहुत अधिक विकसित है पर वे वैसे के वैसे ही । अब यहां पर थ्योरी आती है डीएनए की । इतना एडवांस डीएनए कहाँ से आया क्योंकि उसी प्रजाति के पूर्वज दो जातियों में थे पर एक जाति वहीं की वहीं है और दूसरी बहुत ही उन्नत ।

मनुष्यों में है एलियन डीएनए

इस बात की पुष्टि तो नहीं हुई है पर मनुष्यों का बौध्दिक रूप से इतना एडवांस होना इस बात पर प्रश्न चिन्ह है कि क्या मनुष्य वही वानर है जिसने मानव विकास नियम के आधार पर इतना विकास किया है । और इसका उत्तर है नहीं क्योंकि जिस मनुष्य के पूर्वज वानर थे और बंदर के पूर्वज भी वानर ही थे तो ऐसे में एक जाति का विकास और दूसरा वैसा ही रहना कैसे संभव हो सकता है । इतिहास में सैकड़ों ऐसे सबूत मिले हैं जो यह बताते हैं कि कभी इस दुनिया में एलियंस आया करते थे । मिस्र सभ्यता के अनुसार वे उन एलियन की संतान अपने आपको मानते थे जो दूर से स्पेस शिप के माध्यम आया करते थे और मिस्र के लोग उन्हें अनुनाकी कहा करते थे । हालांकि वे उन्हें देवता मानते थे पर साथ ही वे अपने आपको उनकी सन्तानें मानते थे ।

प्राचीन समय में मानव विज्ञानियों और पुरातत्व सर्वेक्षण में ये पाया गया था कि मिस्र में लोग एलियंस के संपर्क में रहा करते थे । यहां तक की मिस्र के देवताओं और हिन्दू देवताओं में काफी समानता पायी जाती है । प्राचीन मिस्र शिला लिपियों पर मिले अवशेष वे चित्र दर्शाते हैं जो इतिहास में एलियंस प्राणी व एलियन जहाजों के होने का संकेत देते हैं । मिस्र के पिरामिडों और तुतअनखामन ( प्राचीन मिस्र के राजा ) के शापित ममी में ये सबूत मिले हैं जो यह बताते हैं कि प्राचीन समय में भी हेलीकॉप्टर और उड़नतश्तरी देखी जाती थीं । प्राचीन मिस्र में बनी हुई ममी इस बात का संकेत भी देती हैं कि कभी प्राचीन काल में बहुत पेचीदा ब्रेन सर्जरी भी की जाती थीं ।

तो ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि किसी बहुत ही विकसित सभ्यता से मानव जाति का संपर्क इतिहास में था जिसने इस दुनिया को आधुनिकता और विकास देने का काम किया । यदि आपको हमारा यह लेख पसन्द आता है तो नीचे कमेंट करके अवश्य बताएं हमें प्रोत्साहन व खुशी मिलेगी ।

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