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वाइट होल क्या होते हैं , WHITE HOLE in space- Hindivigyan

WHAT IS WHITE HOLE? HOW THEY FORMS?

वाइट होल क्या है और कैसे बनता है ?
white hole in hindi
वाइट होल , white hole 

अन्तरिक्ष में सिर्फ ब्लैक होल नहीं है अपितु इसकी तरह दिखने वाले भी कई ऐसे अंतरिक्ष के अवयव हैं जिन्हें किसी साइंस फिक्शन मान लिया जा सकता है |

विज्ञान के अनुसार ब्लैक होल किसी  भी वस्तु को अपनी अन्दर खींच लेता है क्योंकि वह अंतरिक्ष में सभी दृश्य पदार्थों में सबसे शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण वाला अवयव है |

लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न है कि ब्लैक होल द्वारा खींचे गए पदार्थों को पहुचाया कहाँ जाता है | ऐसे में वाइट होल की विषयवस्तु सामने आती है |

बेहतर जानकारी के लिए वीडियो देखिये


ब्लैक होल के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक  पर क्लिक करें | विज्ञान के अनुसार ब्लैक होल और वाइट होल एक ही घर के  दो दरवाजे हैं | यानि ये  एक दुसरे से जुडे हुए हैं , इस थ्योरी को अल्बर्ट आइंस्टीन ने रोजेन ब्रिज थ्योरी नाम दिया था |

आइंस्टीन की इस  थ्योरी के  अनुसार ब्लैक   होल   एक ऐसा पोर्टल है जो किसी भी मैटर को  परिवर्तित करके उसे एक स्थान से दुसरे स्थान तक लेकर जाने का काम करता है |

उदाहरण के लिए ,   ब्लैक होल प्रत्येक वस्तु को अपने अन्दर समाहित कर लेता है क्योंकि उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति बहुत अधिक है यहाँ तक की प्रकाश को भी अपने भीतर खींच लेता है और उसके द्वारा खींचा गया प्रकाश एक अज्ञात माध्यम से होकर वाइट होल तक पहुचता  है |

ब्लैक होल पर पड़ने वाला पूरा  प्रकाश अब वाइट होल से दिखाई देता है इसलिए इसे वाइट होल की संज्ञा दी गयी है |

white hole in hindi
white hole, वाइट होल 
एक ब्लैक होल के इवेंट होराइजन की सीमा में पहुचने के बाद कोई भी चीज वापिस नहीं आ सकती ठीक इसके विपरीत वाइट होल के इवेंट होराइजन से कोई भी चीज अन्दर नहीं जा सकती |

अगर हम नासा और विभिन्न स्पेस संस्थानों के शोध पर नजर डालें तो एक बात सामने आती है , ब्लैक होल और वाइट होल आपस में जुडे हुए हैं | शोध के अनुसार ब्लैक होल जिस किसी भी वस्तु को निगलता है वह किसी अन्य स्थान पर वाइट होल के माध्यम से निकलता है फिर चाहे वह कोई दूसरी आकाश गंगा हो या फिर दूसरा ब्रम्हांड |
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आइये इसे बेहतर ढंग से समझें


ब्रम्हांड के जन्म से आज तक का इतिहास यद्यपि कोई नहीं जानता लेकिन विज्ञान के दिये ब्रम्हांड उत्पत्ति के सिद्धांत को काफी हद तक सही माना जा सकता है ।

हालांकि विज्ञान भी इस नतीजे पर नहीं पहुच पाया है कि आखिर सत्य क्या है ? विज्ञान के अनुसार इस ब्रम्हांड का जन्म भीषण धमाके के साथ हुआ था ।

इससे पहले ब्रम्हाण्ड सिंगुलैरिटी यानी इस ब्रम्हांड का समस्त द्रव्यमान एक बिंदु में समाया हुआ था । और विज्ञान के अनुसार उस समय किसी भी विज्ञान के नियम और यहां तक कि समय का भी अस्तित्व नहीं था ।

अब प्रश्न उठता है जिसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं , क्या पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतु समय के अस्तित्व के खत्म होने पर भी कार्य करते रहेंगे ।

यानी यदि समय को रोक दिया जाए तो क्या ये ऐसे ही काम करते रहेंगे । विज्ञान की इस थ्योरी की उत्पत्ति हुई ब्लैक होल मॉडल से । ब्लैक होल मॉडल भी ठीक इसी सिद्धांत पर काम करता है ।

ब्लैक होल के अंदर समय का कोई अस्तित्व नहीं है , वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि ब्लैक होल के नजदीक समय धीमा होने लगता है और ब्लैक होल के इवेंट होराइजन यानी वह स्थान जहां से ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण शक्ति का चरम शुरू होता है ।

उस स्थान से समय का कोई अस्तित्व नहीं है इसके अतिरिक्त ब्लैक होल के केंद्र में ही यह सिंगुलेरिटी उपस्थित होती है जहां पर समस्त द्रव्यमान का निचोड़ स्थित होता है ।

किसी लंबी दूरी तक प्रकाश ध्वनि या अन्य कोई संसाधन जब यात्रा करता है, तो उसका द्रव्यमान या तरंग धीमी होती जाती हैं और अंततः यह समाप्त हो जाते हैं ।

ठीक उसी प्रकार ब्लैक होल के संदर्भ में समय भी धीमा होकर शून्य हो जाता है । ब्लैक होल अत्यंत भीषण गुरुत्वाकर्षण वाले होते हैं यानी प्रत्येक वस्तु इनके अंदर पहुंचकर अपने सिंगुलेरिटी स्थिति में पहुंच जाती है ।

अब प्रश्न यह उठता है की अत्यंत बड़े द्रव्यमान वाले पदार्थ जैसे तारे ग्रह उपग्रह आदि ब्लैक होल के अंदर समाहित कैसे हो सकते हैं क्योंकि ब्लैक होल का आकार निश्चित होता है और इस कारण इसके अंदर इतना अधिक मात्रा में मैटर कैसे रह सकता है ? इस तरह उत्पत्ति होती है वाइट होल के अस्तित्व की ।

विज्ञान के अनुसार व्हाइट होल ब्लैक होल का दूसरा हिस्सा है जो एक वॉर्म होल से जुड़े होते हैं । अर्थात ब्लैक होल के इवेंट होराइजन में कोई भी वस्तु पहुंचने के बाद वापस नहीं आती ठीक उसी तरह वाइट होल के इवेंट होराइजन के अंदर कोई भी चीज घुस नहीं सकती ।

इसके अतिरिक्त व्हाइट होल प्रत्येक वस्तु को बाहर निकालता है और ब्लैक होल प्रत्येक वस्तु को अपने अंदर खींच लेता है । इस थ्योरी के अनुसार ब्लैक होल एक टेलिपोर्ट संसाधन भी कहा जा सकता है जो किसी भी मैटर को एक स्थान से अरबो प्रकाश वर्ष दूर किसी दूसरे स्थान पर पहुंचा सकता है । यहां तक कि किसी अन्य समांतर ब्रह्मांड में भी ।

पिछली शताब्दी में इस थ्योरी को अल्बर्ट आइंस्टाइन ने रोजन ब्रिज नाम दिया था , जिस का सिद्धांत भी ठीक ऐसा ही था । अभी तक टेलीस्कोप से देखे गए व्हाइट होल भी ठीक इसी थ्योरी पर ही काम करते हैं ।

व्हाइट होल किसी तारे से अरबों गुना चमकदार होते हैं और इनके अंदर से वस्तुएं बाहर निकलती है । ब्लैक होल से प्रकाश भी बाहर नहीं आ सकता क्योंकि यह प्रकाश ब्लैक होल के अंदर जाकर वाइटहोल से निकलता है ।

इसी कारणवश व्हाइट होल अत्यंत चमकदार होते हैं नासा के हबल टेलीस्कोप से कई ऐसे वाइट होल देखे गए हैं जो पृथ्वी से करीब एक लाख प्रकाश वर्ष दूर है ।

18वीं शताब्दी में जॉन मिसेल और पियरे साइमन लाप्लास ने एक थ्योरी देकर इस दुनिया को चौंका दिया था | उनके अनुसार अत्यधिक द्रव्यमान या अत्यधिक लघु पिंड वाले पदार्थ के गुरुत्वाकर्षण बल से कोई नहीं बच सकता, यहाँ तक की प्रकाश भी नहीं |

दरअसल उनके लघु पिंड का मतलब ब्लैक होल से था जो अत्यंत भीषण गुरुत्वाकर्षण बल वाले होते हैं | और अंततः सन 1967 में जॉन व्हीलर ने इस विषय वस्तु को लेकर ब्लैक होल नामक शब्द का उद्धरण किया |

परन्तु यह सिद्धांत बाद में वाइट होल से जोड़ दिया गया क्योंकि यद्यपि ब्लैक होल आम जनमानस और फिल्म जगत के लिए एक साइंस फिक्शन या फैन्टसी जैसा है लेकिन यह विज्ञानं और इस ब्रम्हांड के दृष्टिकोण से अस्तित्व में है और इसका अस्तित्व विज्ञान के नियम को तोड़ता है |

सन 1679 में एक महान वैज्ञानिक न्यूटन ने यह बात पूरे विश्व को बताई की प्रत्येक पदार्थ के प्रत्येक अणु में आकर्षण बल होता है, और वे एक दुसरे को आकर्षित करते हैं |

हालाँकि विज्ञानं के अनुसार गुरुत्वाकर्षण बल अब तक ज्ञात सभी बलों जैसे घर्षण, दाब, साधारण बलों में से सबसे कमजोर है लेकिन यह बल प्रमुख बल इस लिए है क्योंकि यह इस ब्रम्हांड को निश्चित आकार देता है और ब्रम्हांड को एक निश्चित परिधि में बाँध कर रखता है |

इस ब्लैक होल और वाइट होल के मध्य में एक सुरंग का कार्य वर्म होल करता है | ब्लैक होल मॉडल के अनुसार समय और प्रकाश सबसे अधिक ब्लैक होल के इवेंट होराइजन में कमजोर होते हैं और सबसे ज्यादा तनाव ग्रसित होते है |

अर्थात प्रकाश ब्लैक होल के इवेंट होराइजन में अपने सीधी रेखा में चलने के नियम का पालन नहीं करता और अपनी दिशा से बल के अनुरूप मुड़ जाता है |

ठीक इसी प्रकार समय भी ब्लैक होल के इवेंट होराइजन पर जाकर धीमा हो जाता है , इस लिए वैज्ञानिक इसे समय यात्रा की सम्भावना के रूप में भी देखते हैं |

इसके अतिरिक्त यदि हम समान्तर ब्रम्हांड थ्योरी को मानें तो प्रश्न उठता है की क्या प्रत्येक ब्लैक होल के निर्माण के साथ ही वाइट होल का भी निर्माण होता है और फिर ये एक दुसरे से संपर्क कैसे स्थापित करते हैं |

ऐसे में समान्तर ब्रम्हांड थ्योरी सामने आती है और यह सम्भावना होती है की जिस ब्रम्हांड में हम रह रहे हैं ठीक इसी के समान्तर यदि दुसरे ब्रम्हांड में ब्लैक होल का निर्माण होता है तो हमारे ब्रह्मांड में वाइट होल का निर्माण होगा और यदि हमारे ब्रम्हांड में किसी ब्लैक होल का निर्माण होता है तो उस समान्तर ब्रम्हांड में वाइट होल का निर्माण होगा |

इससे यह सम्भावना अवश्य बनती है की यदि हमारे आस पास कोई ब्लैक होल का जन्म हो तो हम उसके माध्यम से हमारे समान्तर ब्रम्हांड की पृथ्वी पर जा सकते हैं |समान्तर ब्रम्हांड थ्योरी 

हमारा प्रयास विज्ञानं के जटिल से जटिल सिद्धांतों और विषयवस्तु को आसान भाषा में समझाना है | यदि हमसे कोई त्रुटी होती है जिसके विषय में आप हमें कमेंट करके या हमें कांटेक्ट करें |

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